अनुक्रमणिका
| १ | आर्य संस्कृती व तीची रूपांतरे | १८९ | |
| २ | संपादकीय : | शेतकर्यांची आत्महत्या | १९० |
| ३ | प.पू.अप्रबुध्दांच्या कविता | अप्रबुध्द | २०६ |
| ४ | भारतीय विवाहशास्त्र | अप्रबुध्द | २०७ |
| ५ | पुंडलीकाची पेठ | प्रा.म.शं.वाबगावकर | २१४ |
| ६ | विदिशा व मेहरौलीची विष्णु मंदिरे | प्रा.म.रा.जोशी | २१९ |
| ७ | ब्रम्हर्षी अण्णासाहेब पटवर्धनांचे जमीनीच्या मालकी संबधी (वैदिक विधि-न्याय ) विचार | बाळकृष्ण ल वडोदकर | २२४ |
| ८ | रा.स्व.संघ- अध्यात्माची कार्यशाळा | अधिवक्ता यशवंत बा.फडणीस | २३४ |
| ९ | मंदिराव्दारे वाचनालये आवश्यक | मा.य.गोखले | २३९ |
| १० | योगवासिष्ठ- वसिष्ठांची अनुभूती | आचार्या श्रीमती विमल पवनीकर | २४५ |
| ११ | देवयोनी -गुह्यक | आ.सौ.शैलजा भैद | २५२ |
| १२ | ।। कमला ।। | आचार्य सुधाकर देशपांडे | २५३ |
| १३ | श्रीमान हजारेंचे आंदोलन व सामान्य जनतेची भूमिका | श्रीवत्स | २५६ |
| १४ | लोकमान्य बाळ गंगाधर टिळक- आगळया वेगळया व्यक्तीमत्वाचा जाणता नेता | अधि.वि.शं.गोखले | २६२ |
| १५ | अधिक मास-क्षयमास | मोरेश्वर धु. फळके | २६८ |
| १६ | चार्वाक – इतीहास आणि तत्वज्ञान | आ.सौ.उषा गडकरी | २७३ |
| १७ | वादो नावोलम्ब्य : | ज.गो.मराठे | २७८ |
| १८ | पत्रव्यहार | ||
| प्रा.कृष्णा गुरव | २८० | ||
| प्रा.भा.वि.देशकर | २८४ | ||
| प्रमोद रा.गाडगे | २८५ |




