अनुक्रमणिका
| १ | संपादकीय १,२, | २ | |
| २ | वेदांचे अपौरूषेयत्व | डॉ.के.रा.जोशी | ४ |
| ३ | अमेरिकेची राजनैतिक अपरिपक्वता | गो.मा.कुळकर्णी | १७ |
| ४ | चातुर्वर्ण्य व ब्राह्मण | प्रा.ग.शं.वाबगावकर | २१ |
| ५ | कुरूक्षेत्र युध्दापूर्वी अधिकमास आला होता का ? | प्र.व्यं.होले | २६ |
| ६ | श्रीमद्भगवतगीता, गीताई आणि ज्ञानेश्वरी – एक तुलनात्मक आस्वाद | डॉ.सुभाष भागवत | ३२ |
| ७ | त्सुनामीचा कहर : भूकंप आणि २६ तारीख | श्रीश हळदे | ४१ |
| ८ | ’तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते’ साम्यसूत्रे आणि विनोबा | अ.गो.देशपांडे, पु.वि.त्रिवेदी | ४३,४४ |
| ९ | शंकराचार्यावरील फिर्याद : एक प्रतिक्रिया | सुभाष पत्की | ५४ |
| १० | तीन कविता | माधव गोपाळ जामदार | ५६ |
| ११ | पुस्तक परिचय | – | ५८ |
| १२ | ग्रंथ समीक्षा | – | ९२ |
| १३ | प्रती धन्वंतरीचे निधन | श्रीश हळदे | ७८ |




