अनुक्रमणिका
| १ | विलड्युरंट् व भारत | – | ४५ |
| २ | राष्ट्रीय एकात्मतेचा अन्वयार्थ | संपादकीय | ४६ |
| ३ | अभियांत्रिकी व पूर्वमीमांसा | मु.बा.पांढरीकर | ६२ |
| ४ | राजकीय राजरंग | डॉ.गो.मा.कुळकर्णी | ६९ |
| ५ | भारतीयवादाची व्यवच्छेदके | डॉ.ब.स.येरकुंटवार | ७४ |
| ६ | तीन साहित्ये | – | ७८ |
| ७ | कविते ! करिन तुला मी ठार! | ज.के.उपाध्ये | ८० |
| ८ | आर्यानार्य समस्येचा घोळ | डॉ.वि.श्री.वाकणकर | ८१ |
| ९ | शरदाचं चांदणं | – | ८६ |
| १० | मंत्र विद्येचे मानवी जीवनात स्थान | डॉ.ब.स.येरकुंटवार | ९० |




