अनुक्रमणिका
| १ | श्री ज्ञानेशांचे चरणी | १ | |
| २ | आर्शिर्वाद | माधव गोविंद गोडबोले | २ |
| ३ | विशेषांकाची पार्श्वभुमी | संपादकीय | ३-७ |
| ४ | योग आणि विज्ञान | श्री अप्रबुध्द | ८-२३ |
| ५ | आधुनिक मराठी कविता (कविता) | स्वच्छंद | २४ |
| ६ | स्त्रीविषयक आदर्श : जुना आणि नवा | प्रा.श्री.के.क्षिरसागर | २५-३१ |
| ७ | जगातील समाजक्रांति व हिंदुस्थान | बाळाजी हुद्यार | ३२-३७ |
| ८ | हे साफ खोटे आहे | प्रा.प्र.ना.अवसरीकर | ३८-५३ |
| ९ | दोन राष्ट्रवादः पाश्चात्य व भारतीय | शंकर महादेव कोलते | ५४-६२ |
| १० | औद्योगिक संस्कृतीचे भवितव्य! | प्रफुल्ल सराफ | ६३-७३ |
| ११ | सत्य आणि सरकार | जी.द.दवे | ७४-७८ |
| १२ | राष्ट्रीय ऐक्य आणि निष्ठास्वातंत्र्य | प्रा.दि.के.बेडेकर | ७९-८६ |
| १३ | न्याय मंदिरात | ‘समीक्षक’ | ८७-९३ |
| १४ | सत्व लावूं पणा ! (कविता) | सौ.कांन्ता रहाटगावकर | ९४ |
| १५ | आमची भुमिका : आमचा मार्ग | ब.स.येरकुंटवार | ९५-११५ |
| १६ | आम्ही कोण? आमचे ध्येय काय? | डॉं. शरदचंद्र निळकंठ भगत | ११६-१२१ |
| १७ | भारतीयांचा अर्थशास्त्रीय दृष्टीकोन | प्रा.भा ह.मुंजे | १२२-१३० |
| १८ | संस्कृति की क्रांतिःएक वैचारिक गल्लत | अॅड.मनोहर केळकर | १२१-१३२ |
| १९ | विज्ञानातून उद्भवलेल्या आर्थिक समस्या | प्रा.अरविंद स.जोशी | १३३-१४० |
| २० | ज्ञानेश्वरांचे समाधीस (कविता) | त्र्यंबक गोविंद पंडे | १४१ |
| २१ | शंका -समाधान | तत्वदर्शी | १४२-१४४ |
| २२ | भारतीय धारणा व इतिहास कल्पना | हरिहर पुनर्वसु | १४५-१५४ |
| २३ | मार्क्सवादाचे भारत वर्षातील भवितव्य (श्री मोटे यांची मुलाखत) | १५५-१६४ | |
| २४ | वैज्ञानिक व सांस्कृतिक दृष्टीकोन | प्रा.नारायणशास्त्री द्रविड | १६५-१६९ |
| २५ | कनिष्काची गोधडी | श्री अप्रबुध्द | १७०-१७८ |
| २६ | भारतीय धारणा व ‘मानवतावाद’ | न.ना.भिडे | १७९-१८९ |
| २७ | राष्टैक्य आणि भारताची संस्कृति | प्रा.श्री.मा.कुळकर्णी | १९०-१९७ |
| २८ | भारतीय संस्कृतीचे भविष्य | बाळ पाईक | १९८-२०९ |
| २९ | विज्ञानवादातील पोकळपणा | ‘अभ्यासक’ | २१०-२२२ |
| ३० | करंटी सरस्वती ! | ‘वंचित’ | २२३-२०३० |
| ३१ | प्राचीन भारतीयांची विज्ञानोपासना | गोपाळ गजानन जोशी | २३१-२४२ |
| ३२ | भारतीय धारणा समिती वृत्त | २४३ | |
| ३३ | अप्रिय पण पथ्यः |




