अनुक्रमणिका
| १ | ’चमत्कारा’ चे प्रयोजन | ले. अप्रबुध्द | १११ |
| २ | पुढारी वर्गासंबंधी आणखी काही | डॉ.ब.स.येरकुंटवार | ११२ |
| ३ | समाजाचे ऋण | डॉ. गु.वा.पिंपळापूरे | ११८ |
| ४ | पुस्तक – परिचय – संत ज्ञानदेव चरित्र-कार्य व तत्वज्ञान | डॉ.म.रा.जोशी | १२२ |
| ५ | बहकलेली चमत्कार मिमांसा | डॉ.ब.स.येरकुंटवार | १२५ |
| ६ | मराठी संशोधन व प्रबंध लेखन | डॉ.म.रा.जोशी | १३७ |
| ७ | शरदाचं चांदणं – जेथे राघव तेथे सीता | सौ. प्रमिल वसंत कुळकर्णी | १४१ |
| ८ | उगवती क्षितिजं – त्याचा प्रवास | रविंद्र परेतकर | १४७ |
| ९ | आम्ही अबोल होत आहोत | डॉ.त्र्यं.गो.पंडे | १५० |
| १० | न्याय मंदिरात पसायदान ज्ञानदेवाचे मागणे | डॉ. गु.वा.पिंपळापूरे | १४९ |
| ११ | औद्योगिक संस्कृती आणि सृष्टीतील,समतोल | डॉ.ब.स.येरकुंटवार | १५७ |




