अनुक्रमणिका
| १ | सावधान, सावधान | श्रीरामदास आणि रामदासी | १ |
| २ | इंग्रजी छापाची एक शंका | ले अप्रबुध्द | २-५ |
| ३ | एक विघातक समजूत ! | ले. शंकर महादेव कोलते | ६-१२ |
| ४ | पुण्याचे सुप्रसिध्द डॉ.सहस्त्रबुध्दे ह्यांचे भाषण ऐकून | प्रा.गोपाल गुप्त | १३-१४ |
| ५ | अर्न्तदृष्टि व इंद्रियज्ञान (उत्तरार्ध) | नारायण शास्त्री द्रविड | १५-१९ |
| ६ | संयमात सौंदर्य आहे | वि.स.जोग | २०-२४ |
| ७ | भारतीयत्वाचे शिक्षण ! | स. धुं. बापट | २५-२९ |
| ८ | ‘श्रध्दामयोडयं पुरुष: | भा.ह.मुंजे | ३०-३४ |
| ९ | श्रीसमर्थ या काळात असते तर! | ब.स.येरकुंटवार | ३५-४३ |
| १० | प्रचारवृत्त | अप्रबुध्द | ४४-४५ |
| ११ | अतीन्द्रिय संशोधन | ले.पाखंडी | ४६-५५ |
| १२ | संपादकीय निवेदन | – | ५६ |




