अनुक्रमणिका
| १ | स्वामी विवेकानंद आणि आमच्या सामाजिक संस्था | १९३ | |
| २ | संपादकीय | १९४ | |
| ३ | प. पू. अप्रबुद्धांच्या कविता | २०५ | |
| ४ | धर्मशास्त्र | कै. अप्रबुद्ध | २०६ |
| ५ | बहकलेली चमत्कार-मीमांसा ! | ब. स. येरकुंटवार | २१२ |
| ६ | प्रतिक्रिया १ | प्रा. वाबगावकर | २२४ |
| ७ | प्रतिक्रिया २ | डॉ. भा. वि. देशकर | २२६ |
| ८ | प्रतिक्रिया ३ | डॉ. प. वि. वर्तक | २२८ |
| ९ | विवाह आणि ज्योतिषशास्त्र | डॉ. भा. वि. देशकर | २३३ |
| १० | कालिदासाची वैज्ञानिक प्रतिभा | डॉ. नी. र. वर्हाडपांडे | २३६ |
| ११ | योगवासिष्ठातील वैराग्यविचार – श्रीरामाचे वैराग्य | डॉ. श्रीमती विमल पवनीकर | २४० |
| १२ | पिंडी ते ब्रह्मांडी | अधि. य. बा. फडणीस | २४४ |
| १३ | उत्क्रांतीची नवी संकल्पना : डार्विनला आव्हान! | डॉ. अविनाश चाफेकर | २५० |
| १४ | लोकमान्य टिळक : काही स्मरणगाठी | अधि. वि. शं. गोखले | २५३ |
| १५ | कोणता धर्म ? | प्रा. डॉ. के. वा. आपटे | २५६ |
| १६ | इंग्रजी भाषा मंत्रशास्त्रानुसार वैकृत – श्रीगुलाबराव महाराज रुपांतर : | अधिवक्ता गो. का. आठवले | २५८ |
| १७ | भरतवाक्य | आचार्य म. रा. जोशी | २६० |
| १८ | अशिष्याय न देयं | ज. गो. मराठे | २६२ |
| १९ | हरीतकी | वैद्य जयंत यशवंत देवपुजारी | २६४ |
| २० | संतकवि दासगणू महाराजांचे अनुपमग्रंथ शिल्प : श्री गजानन विजय | डॉ. जयश्री शास्त्री | २६६ |
| २१ | पुस्तक परिचय | २७१ | |
| २२ | पत्रव्यवहार |




