अनुक्रमणिका
| १ | आता माझे सखे येती वारकरी | ब.स.येरकुंटवार | ५९ |
| २ | मागोवा घेतु : वाट पुसतु | आत्र्जनेय | ७३ |
| ३ | इतिहास मिमांसेची काही मूलभूत सुत्रे | बाळ पाईक | ९४ |
| ४ | श्री ज्ञानदेवीची ऐतिहासिक – पार्श्वभूमी | प्रा. रा.ना.घाटोळे | ९६ |
| ५ | छळ खरोखरच झाला काय ? | प्रा.सौ.उषा देशपांडे | १०७ |
| ६ | इथे मराठीचिये नगरी | ब.स.येरकुंटवार | ११४ |
| ७ | चंद्रामृतांचे तळे | डॉ. शरच्चंद्र भगत | १३३ |
| ८ | श्री ज्ञानदेवांच्या जिवंत समाधीचा अर्थ | ब.स.येरकुंटवार | १३८ |
| ९ | आणि ग्रंथोपजीविये | डॉ. त्र्यं.गो.पंडे | १४९ |
| १० | नाथपंथ व श्रीगुरू गहनीनाथ | श्री. ग.रा.जोशी | १५५ |
| ११ | अभागी मेरुमणि विट्ठलपंत | ब.स.येरकुंटवार | १६४ |
| १२ | चिद – विलास – वाद | प्रा. ग.वा.पिंपळापूरे | १७४ |
| १३ | चिदविलासवादाची निबिड गुंफा : एक टिपण | ब.स.येरकुंटवार | १९६ |
| १४ | अभिनव दर्शन : कविता | डॉ. त्र्यं.गो.पंडे | २०१ |
| १५ | संपादकीय : शिळा सारा ज्ञानेश्वरा ! | संपादकीय | २०३ |




