अनुक्रमणिका
| १ | तंत्रशास्त्र | श्री अप्रबुध्द | २-८ |
| २ | हिंदु समाज-सहिष्णू की उदासीन? | प्र.श्री.मा.कुळकर्णी | ९-१६ |
| ३ | शंका-समाधान | ले. तत्वदर्शी | १७-१९ |
| ४ | भारतीय जीवनास लागलेली कीड | प्रा.भा.ह.मुंजे | २०-२५ |
| ५ | ‘न्याय-मंदिरां’ त (स्वप्नांचे सेतू) | समीक्षक | २६-३४ |
| ६ | लज्जा ! | श्री अप्रबुध्द | ३५-३९ |
| ७ | आक्रंदन ! | सौ.कांता रहाटगांवकर | ४० |
| ८ | भरतभेट | विष्णु शर्मा | ४१-४५ |
| ९ | गणू काका | बाळ पाईक | ४६-५२ |
| १० | ‘प्रज्ञालोक’ चे प्रशंसनीय कार्य | प्रा. डॉ. श. दां. पेंडसे (शुभचिंतक) | ५३-५४ |
| ११ | संपादकीय स्फुट-विचार | – | ५५-५६ |
| १२ | आधुनिक स्त्री जीवनाचे रळेपळे | ब.स.येरकुंटवार | ५७-६० |
| १३ | ह.भ.प. धुंडा महाराजांचा सत्कार | – | ६१ |
| १४ | राम-झरोका | आत्र्जनेय | ६२ |
| १ | तंत्रशास्त्र | श्री अप्रबुध्द | २-८ |
| २ | हिंदु समाज-सहिष्णू की उदासीन? | प्र.श्री.मा.कुळकर्णी | ९-१६ |
| ३ | शंका-समाधान | ले. तत्वदर्शी | १७-१९ |
| ४ | भारतीय जीवनास लागलेली कीड | प्रा.भा.ह.मुंजे | २०-२५ |
| ५ | ‘न्याय-मंदिरां’ त (स्वप्नांचे सेतू) | समीक्षक | २६-३४ |
| ६ | लज्जा ! | श्री अप्रबुध्द | ३५-३९ |
| ७ | आक्रंदन ! | सौ.कांता रहाटगांवकर | ४० |
| ८ | भरतभेट | विष्णु शर्मा | ४१-४५ |
| ९ | गणू काका | बाळ पाईक | ४६-५२ |
| १० | ‘प्रज्ञालोक’ चे प्रशंसनीय कार्य | प्रा. डॉ. श. दां. पेंडसे (शुभचिंतक) | ५३-५४ |
| ११ | संपादकीय स्फुट-विचार | – | ५५-५६ |
| १२ | आधुनिक स्त्री जीवनाचे रळेपळे | ब.स.येरकुंटवार | ५७-६० |
| १३ | ह.भ.प. धुंडा महाराजांचा सत्कार | – | ६१ |
| १४ | राम-झरोका | आत्र्जनेय | ६२ |




