अनुक्रमणिका
| १ | हिंदु शिक्षण पध्दतीची सफलता | डॉ.अ.स.आळतेकर | १२१ |
| २ | आव्हान | ले अप्रबुध्द | १२२-१२९ |
| ३ | आजची तरूण पिढी व समाजाच्या अपेक्षा | मोहन माधव फाटे | १३०-१३२ |
| ४ | अन्तर्दर्शन व इन्द्रियज्ञान | नारायणशास्त्री द्रविड | १३३-१३६ |
| ५ | वाचकांचे मनोगत | दे. शं. लुकतुके | १३७-१३८ |
| ६ | शंका समाधान | तत्वदर्शी | १३९-१४५ |
| ७ | ब्राह्मणांच्या सामाजिक संस्थेचे लक्षण | रघुनाथ हरी वर्डीकर | १४६-१४८ |
| ८ | अमेरिकेतील स्त्री-जीवन | डॉ.प्रा.गो.मा.कुळकर्णी | १४९-१५४ |
| ९ | इतिहासातील साक्ष कशाला ? | कु.मुक्ता स.जोशी | १५५ |
| १० | ‘झिंगलेले आणि झपाटलेले!! | – | १५६-१६० |
| ११ | वेदमार्ग व तंत्रमार्ग | श्री अप्रबुध्द | १६१-१६७ |
| १२ | साभार – पोच | – | १६८ |
| १३ | भारतीय- धारणा- समिती- वृत्त्तांत | – | १६९-१७१ |
| १४ | परंपरा म्हणजे काय ? | एक अभ्यासक | १७२-१७४ |
| १५ | राम-झरोका | आत्र्जनेय | १७५ |




