अनुक्रमणिका
| संपादकीय | |||
| १ | वैदिक संस्कार | श्री अप्रबुद्ध | ३-८ |
| २ | प्रतिष्ठेची भावना | प्रा.दि.के.बेडेकर | ९-१६ |
| ३ | जातीय दंश | प्रा.प्रा.कृ.सावळापुरकर | १७-२४ |
| ४ | शंका समाधान | ले. तत्वदर्शी | २५-२९ |
| ५ | पांचालीचे दु:ख | प्रा. वसंत वर्हाडपांडे | ३०-३२ |
| ६ | अनुराधे च्या निमित्ताने | प्रा.श्री.मा.कुलकर्णी | ३३-४१ |
| ७ | जो ज्याचा निर्माता तो त्याचा नियंत्रक ! | वैद्यराज जीवराम हरजीवन दवे | ४२-४६ |
| ८ | ’न्याय मंदिरात’ | ले. समीक्षक | ४७-५३ |
| ९ | संस्कृतवाणी भारताची चेतना आहे | प्रा. के. रा. जोशी | ५४-५७ |
| १० | आमची धर्मसमीक्षा : एक अपुर्व चीज | डॉ ब. स. येरकुंटवार | ५८-६४ |




