अनुक्रमणिका
| १ | संपादकीय -१ नव्या सहस्त्रकाचा पहिला रौद्र / बीभत्स परिचय | – | १३९ |
| २ | दहशतवादाचा भस्मासुर | गो.मा.कुळकर्णी | १४३ |
| ३ | पाक होने से बचाया | दादुमिया, बडोदे | १४६ |
| ४ | व्यासादिकांची उशिटे १ : कस्मात मे हरिणं मन : | – | १५४ |
| ५ | व्यासादिकांची उशिटे २ : ईशा वास्यमिदम् | – | १५९ |
| ६ | ग्रंथ परिचय : नाथ माझा भक्तराज | – | १६३ |
| ७ | पुस्तक परिचय | सौ.श्रृतिकीर्ती वि.सप्रे | १६४ |
| ८ | हृदय | संपादकीय | १६५ |
| ९ | पत्रव्यवहार स्वामी वरदानंद भारती दुर्योधन – एक मुर्तिमंत अहंकार | – | १६७ |
| १० | पत्रव्यवहार – मुकुन्द केशव दिक्षित | – | १७१ |
| ११ | दुर्योधन एक कवडया : | संपादक | १७३ |
| १२ | वाचे बरवे वाचकत्व : सॉफ्ट ड्रिंक्स व्हेज की नॉन व्हेज ? | सुभाष वि. पत्की | १७७ |
| १३ | संपादकीय २ : श्री अप्रबुध्द विचारदर्शन एक शलाका | – | १७८ |
| १४ | सामाजिक आचाराचे पहारेकरी | प्रा.राम शेवाळकर | १८२ |
| १५ | वेदोक्त ब्राह्मण आणि नाथ वचने | वासुदेव गो.चोरघडे | १८४ |
| १६ | ब्राह्मण्य : समज अपसमज | आचार्य के.रा.जोशी | १८९ |
| १७ | भाष्यकार श्री शंकराचार्य व ब्राह्मण : | आचार्य गुणाकर वामन पिंपळापूरे | १९५ |
| १८ | ब्राह्मणाचे शुध्दीकरण ! | डॉ.ब.स.येरकुंटवार | २०८ |
| १९ | ब्राह्मण : एक राष्ट्रीय प्रश्न : | कै अप्रबुध्द -सार संकलन | २२२ |




