अनुक्रमणिका
| अवतरण | अप्रबुद्धांचे विचार | ०१ |
| संपादकीय | डॉ. सौ. वीणा गानु | ०३ |
| चिंतन श्रीगणेशाचे | मकरंद अभ्यंकर | ०४ |
| नाव मारुतीचे घ्यावे … | सौ. ममता गद्रे | ११ |
| मत्स्य पुराणातील पुण्यसलिला | डॉ. मुकुन्द नागेश देशपांडे | १५ |
| भगवद्गीतेचे प्रयोजन | डॉ. रोहिणी केतकर | २० |
| अथातो देवदर्शनजिज्ञासा | डॉ. लीना रस्तोगी | २७ |
| वेद आणि आपले जीवन | श्री. वामनबुवा वासुदेव कोल्हटकर | ३२ |
| डार्विनचा उत्क्रांतिवादी सिद्धांत… | प्राचार्य अद्वयानंद गळतगे | ४० |
| ब्राह्मण्य रक्षावे आदरे | डॉ. संजीवनी मुलमुले | ४८ |
| गीतेतील भक्तियोग | ५६ | |
| संस्कृत-एक अद्भूत भाषा | डॉ.लीना रस्तोगी | ५८ |
| कुठे ज्ञानेश्वर महाराज आणि… | कै. अप्रबुद्ध | ६२ |
| सौंदर्य नवरसांचे | सौ. माधुरी बनसोड | ६६ |
| गोपाळकाला | सौ. गौरी निलेश पाठक | ७२ |
| आयुष्याचा नाश होतो राम… | श्री. श्रीनिवास गोटे | ७५ |
| मै शमा हूँ, तू है परवाना | दीपाली पाटवदकर | ७८ |
| कावड | श्रीमती उषाताई परांजपे | ८३ |
| हेमाद्रिविरचित राजप्रशस्ती | म. रा. जोशी | ८६ |
| ग्रंथास्वाद | ||
| डॉ. बळीराम सदाशिव येरकुंटवार… | डॉ. वीणा गानु | ८८ |




